दोपहर हो गई है, कोई बाहर नहीं आने वाला था। सब काम कर रहे हैं, चिल्लाने का कोई मतलब नहीं है, कोई मेरी बात नहीं सुन सकता। ज्हानवी ने सोचा था ।
वो भी बहुत गुस्से में लग रहा था। ज्हानवी की गर्दन पर उसका हाथ कस गया और वह हांफने लगी।

दोपहर हो गई है, कोई बाहर नहीं आने वाला था। सब काम कर रहे हैं, चिल्लाने का कोई मतलब नहीं है, कोई मेरी बात नहीं सुन सकता। ज्हानवी ने सोचा था ।
वो भी बहुत गुस्से में लग रहा था। ज्हानवी की गर्दन पर उसका हाथ कस गया और वह हांफने लगी।

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