शाम के 7 बजे थे। बाहर हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी।
जाह्नवी बालकनी में खड़ी थी, उसकी नज़रें दूर कहीं बादलों की लकीरों में उलझी थीं। मन कुछ खाली-सा लग रहा था।

शाम के 7 बजे थे। बाहर हल्की बारिश शुरू हो चुकी थी।
जाह्नवी बालकनी में खड़ी थी, उसकी नज़रें दूर कहीं बादलों की लकीरों में उलझी थीं। मन कुछ खाली-सा लग रहा था।

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