ध्यानचंद ने उसे एहसास दिलाया था और प्रताप सिर झुकाकर सुन रहा था लेकिन उसके चेहरे पर बेचैनी साफ तौर पर दिखाई दे रही थी । ।
" अब से मैं यहां संभालुगा । ।"

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ध्यानचंद ने उसे एहसास दिलाया था और प्रताप सिर झुकाकर सुन रहा था लेकिन उसके चेहरे पर बेचैनी साफ तौर पर दिखाई दे रही थी । ।
" अब से मैं यहां संभालुगा । ।"

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