रात की नीली चाँदनी हवेली की पुरानी, ऊँची खिड़कियों से भीतर गिर रही थी।
ठंडी हवा परदों को हौले से छूकर गुजर रही थी, जैसे कमरे में कोई अनदेखी रूह सांस ले रही हो।

रात की नीली चाँदनी हवेली की पुरानी, ऊँची खिड़कियों से भीतर गिर रही थी।
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